नरवाई जलाने पर कार्रवाई से किसानों में आक्रोश: सरकार के लिए बनी चुनौती

नरवाई जलाने पर कार्रवाई से किसानों में आक्रोश

देवास, अप्रैल 2026। मध्यप्रदेश में खेतों में नरवाई जलाने पर कार्रवाई से किसानों में आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। देवास जिले के सोनकच्छ क्षेत्र में सैकड़ों किसानों ने भारतीय किसान संघ के बैनर तले विरोध प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।

किसानों का आरोप है कि नरवाई जलाने पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करना उनके लिए परेशानी का कारण बन रहा है, जबकि इसके वैकल्पिक समाधान अभी तक जमीन पर प्रभावी रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

नरवाई जलाने पर प्रतिबंध और सख्ती

नरवाई जलाने पर किसानों का विरोध सोनकच्छ

राज्य सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से नरवाई जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। प्रशासन द्वारा सैटेलाइट मॉनिटरिंग और मैदानी निगरानी के जरिए ऐसे मामलों पर नजर रखी जा रही है।

हाल ही में जिला प्रशासन द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि:

  • नरवाई जलाने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी
  • किसानों पर आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा
  • हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) अनिवार्य किया गया है

इन सख्त नियमों के चलते कई जिलों में किसानों पर कार्रवाई के मामले सामने आए हैं, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।

किसानों में बढ़ता आक्रोश

सोनकच्छ क्षेत्र में हुए विरोध प्रदर्शन में किसानों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। किसानों का कहना है कि:

  • नरवाई नष्ट करने के लिए पर्याप्त मशीनें उपलब्ध नहीं हैं
  • वैकल्पिक तकनीक महंगी और हर किसान की पहुंच से बाहर है
  • समय पर फसल की तैयारी के लिए नरवाई हटाना जरूरी होता है

किसानों ने मांग की कि जब तक सरकार कोई सस्ता और प्रभावी समाधान उपलब्ध नहीं कराती, तब तक नरवाई जलाने की अनुमति दी जानी चाहिए।

भारतीय किसान संघ का आरोप

भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार किसानों की आय बढ़ने के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत अलग है।

किसान संघ के अनुसार:

  • फसल मंडियों में किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा
  • उत्पादन लागत बढ़ती जा रही है
  • महंगाई के कारण कृषि कार्य महंगे हो गए हैं

उन्होंने यह भी कहा कि केवल दंडात्मक कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि किसानों को व्यावहारिक विकल्प देने होंगे।

हाल के घटनाक्रम से बढ़ी नाराजगी

हाल ही में जिले में नरवाई जलाने के मामलों पर प्रशासन द्वारा जुर्माना और एफआईआर दर्ज किए जाने की खबरों के बाद किसानों में असंतोष और बढ़ गया है।

कई जगहों पर:

  • किसानों पर ₹2500 से ₹15000 तक का जुर्माना लगाया गया
  • प्रशासन द्वारा सख्त निगरानी की जा रही है
  • संयुक्त टीमों द्वारा खेतों का निरीक्षण किया जा रहा है

इन कार्रवाइयों को लेकर किसान इसे “एकतरफा निर्णय” मानते हुए विरोध कर रहे हैं।

एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

नरवाई जलाने पर कार्रवाई से किसानों में आक्रोश

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन एसडीएम सोनकच्छ को सौंपा। ज्ञापन में प्रमुख मांगें शामिल हैं:

  • नरवाई जलाने पर कार्रवाई पर रोक लगाई जाए
  • फसल अवशेष प्रबंधन के लिए ठोस और सस्ती व्यवस्था की जाए
  • किसानों को मशीनों पर सब्सिडी दी जाए
  • कृषि ऋण अदायगी की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए

किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आगे और बड़े आंदोलन किए जाएंगे।

सरकार की चुनौतियां

नरवाई जलाने पर रोक लगाना पर्यावरण के लिए जरूरी है, लेकिन इसे लागू करना सरकार के लिए चुनौती बनता जा रहा है।

एक ओर:

  • वायु प्रदूषण रोकने की जरूरत है
  • पर्यावरण संरक्षण जरूरी है

दूसरी ओर:

  • किसानों की व्यावहारिक समस्याएं हैं
  • संसाधनों की कमी है
  • समय का दबाव होता है

ऐसे में संतुलन बनाना प्रशासन के लिए आसान नहीं है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नरवाई जलाने के बजाय:

  • स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम
  • रोटावेटर
  • बायो-डीकंपोजर

जैसी तकनीकों का उपयोग करना चाहिए। हालांकि, इन तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता और जागरूकता की जरूरत है।

निष्कर्ष

सोनकच्छ में किसानों का यह विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि नरवाई जलाने पर सख्ती अब एक बड़ा सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दा बन चुकी है।

जहां एक तरफ पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता है, वहीं दूसरी तरफ किसानों की समस्याओं का समाधान भी उतना ही जरूरी है।

अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या संतुलित निर्णय लेती है, जिससे पर्यावरण और किसानों—दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।