देवास, 30 मार्च 2026। जिले के सोनकच्छ क्षेत्र के ग्राम गंजपुरा और जलेरिया में करीब 27 वर्षों बाद ऐतिहासिक गांव ग़ैर माता पूजन का आयोजन किया गया। गांव की सुख-शांति, समृद्धि और एकता के लिए आयोजित इस विशेष पूजा में हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और मां के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि गांव की एकता, सामाजिक सद्भाव और परंपराओं को जीवित रखने का भी एक सशक्त उदाहरण बना।
शुभ मुहूर्त में शुरू हुआ पूजन
गांव ग़ैर माता पूजन का शुभारंभ 29 मार्च की रात्रि 12:40 बजे किया गया, जो कि विधि-विधान के अनुसार तय मुहूर्त था। यह पूजा सुबह करीब 5:00 बजे तक चली, जिसमें पूरे गांव के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
पूजन पूरी श्रद्धा और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि इतने लंबे समय बाद इस तरह का आयोजन होना गांव के लिए बेहद खास और यादगार रहा।
भक्ति और आस्था का अद्भुत दृश्य
ग्राम जलेरिया में इस अवसर पर भक्ति, प्रेम और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिला। गांव के लोग पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे, हाथों में पूजा की थाली और सिर पर कलश लेकर निकले।
- महिलाएं और पुरुष नई पोशाक में शामिल हुए
- बैंड-बाजा, ढोल और डीजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई
- ग्रामीण नाचते-गाते हुए शीतला माता मंदिर पहुंचे
इस दौरान पूरा गांव भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आया, जहां हर तरफ माता के जयकारे गूंज रहे थे।
शीतला माता और मां अंबिका की विशेष पूजा
इस आयोजन में विशेष रूप से माता शीतला और मां अंबिका की पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीणों का मानना है कि माता के आशीर्वाद से गांव में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली बनी रहती है।
ग्रामीणों ने बताया कि:
- माता की कृपा से गांव में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है
- इस पूजा से आपसी मतभेद समाप्त होते हैं
- गांव में एकता और भाईचारा मजबूत होता है
पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने माता से गांव की खुशहाली और समृद्धि की कामना की।
पंडित के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन
ग्राम गंजपुरा में यह पूजन पंडित देवेन्द्र शर्मा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उन्होंने पूरे आयोजन को विधि-विधान के अनुसार संपन्न कराया और ग्रामीणों को पूजा की महत्ता के बारे में बताया।
वहीं, ग्राम जलेरिया में भी यह आयोजन पूरी श्रद्धा, अनुशासन और सद्भावना के साथ संपन्न हुआ, जिसमें गांव के सभी वर्गों के लोगों ने एकजुट होकर हिस्सा लिया।
हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
इस विशेष आयोजन में दोनों गांवों के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। ग्रामीणों ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को भी इस आयोजन में आमंत्रित किया था।
- हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए
- सभी ने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया
- गांव में मेले जैसा माहौल देखने को मिला
यह आयोजन सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से एक बड़ा उत्सव बन गया।

27 साल बाद क्यों खास रहा यह आयोजन?
ग्रामीणों के अनुसार, गांव ग़ैर माता पूजन करीब 27 वर्षों बाद आयोजित किया गया, जिससे इसकी विशेषता और भी बढ़ गई।
इस आयोजन के महत्व के पीछे कई कारण रहे:
- परंपरा को पुनर्जीवित करना
- नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना
- गांव में एकता और समरसता बढ़ाना
- धार्मिक आस्था को मजबूत करना
इस तरह के आयोजन ग्रामीण जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सामाजिक मजबूती लाते हैं।
गांव की एकता का प्रतीक बना आयोजन
गांव ग़ैर माता पूजन केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गांव की एकता और अखंडता का प्रतीक भी है। इस आयोजन में सभी वर्गों के लोगों ने बिना किसी भेदभाव के हिस्सा लिया और एकजुटता का संदेश दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन:
- आपसी भाईचारे को बढ़ाते हैं
- समाज में सद्भावना स्थापित करते हैं
- परंपराओं को जीवित रखते हैं
निष्कर्ष
सोनकच्छ क्षेत्र के गंजपुरा और जलेरिया में आयोजित गांव ग़ैर माता पूजन ने यह साबित कर दिया कि ग्रामीण भारत में आज भी परंपराएं और आस्था जीवित हैं। 27 वर्षों बाद हुए इस आयोजन ने न केवल धार्मिक भावना को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी नई ऊर्जा दी।
इस तरह के आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनते हैं और समाज को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



