
देवास, 22 मार्च 2026। जिले में रबी फसलों, विशेषकर गेहूं की कटाई का सीजन शुरू होते ही नरवाई (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि नरवाई जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है और ऐसा करने वाले किसानों पर आर्थिक दंड (जुर्माना) लगाया जाएगा।
जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण और अपनी भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए नरवाई में आग लगाने से बचें।
क्या है प्रशासन का आदेश?
प्रशासन द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया गया है, जिसके अनुसार जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है।
इस आदेश के तहत:
- सभी हार्वेस्टर संचालकों और एजेंटों के लिए स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) का उपयोग अनिवार्य किया गया है
- फसल कटाई के बाद अवशेष को जलाने की बजाय मशीनों से भूसा बनाने के निर्देश दिए गए हैं
- नियमों का उल्लंघन करने पर चालानी कार्रवाई की जाएगी
नरवाई जलाना क्यों है खतरनाक?
नरवाई जलाने से सिर्फ पर्यावरण ही नहीं बल्कि किसानों की खुद की जमीन को भी नुकसान होता है। विशेषज्ञों के अनुसार:
- मिट्टी के लाभदायक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं
- कार्बनिक पदार्थ खत्म हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है
- जलधारण क्षमता कम हो जाती है, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है
- पोषक तत्वों का अवशोषण कम होता है, जिससे पैदावार में गिरावट आती है
- वायु प्रदूषण बढ़ता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है
समाधान क्या है? (किसानों के लिए विकल्प)
कृषि विभाग ने किसानों को नरवाई जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी है:
1.स्ट्रॉ रीपर का उपयोग करें
गेहूं कटाई के बाद स्ट्रॉ रीपर से नरवाई को भूसे में बदला जा सकता है 2. रोटावेटर चलाएं
नरवाई को मिट्टी में मिलाने के लिए रोटावेटर का उपयोग करें 3. बायो-डीकंपोजर का छिड़काव करें
इससे नरवाई खेत में ही सड़कर खाद में बदल जाती है
इन तरीकों से किसान अपनी जमीन की उर्वरता बढ़ा सकते हैं और अतिरिक्त खाद पर खर्च भी कम कर सकते हैं।
सैटेलाइट से हो रही निगरानी
उप संचालक कृषि गोपेश पाठक के अनुसार, जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
- सैटेलाइट के माध्यम से निगरानी की जा रही है
- मैदानी स्तर पर संयुक्त टीम सक्रिय है
- राजस्व विभाग, कृषि विभाग, पंचायत विभाग
ये टीमें लगातार क्षेत्र का निरीक्षण कर रही हैं और उल्लंघन की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
कितना लगेगा जुर्माना?
नरवाई जलाने पर किसानों से पर्यावरण क्षति पूर्ति के रूप में जुर्माना वसूला जाएगा:
- 2 एकड़ से कम भूमि: ₹2500
- 2 से 5 एकड़ तक भूमि: ₹5000
- 5 एकड़ से अधिक भूमि: ₹15000
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक घटना पर अलग से जुर्माना लगाया जाएगा।
किसानों से अपील
जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने सभी किसानों से अपील की है कि वे नरवाई में आग न लगाएं और वैकल्पिक तरीकों को अपनाएं।
यह न केवल:
- पर्यावरण की रक्षा करेगा
- मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखेगा
- आर्थिक नुकसान से बचाएगा
बल्कि भविष्य की खेती को भी अधिक लाभकारी बनाएगा।
निष्कर्ष
देवास जिले में नरवाई जलाने पर प्रतिबंध और सख्त निगरानी यह दर्शाती है कि प्रशासन अब इस समस्या को गंभीरता से ले रहा है। किसानों के लिए यह जरूरी है कि वे पारंपरिक लेकिन नुकसानदायक तरीकों को छोड़कर आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ें।
नरवाई जलाना एक आसान समाधान लग सकता है, लेकिन इसके दीर्घकालिक नुकसान कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में जागरूकता और सही तकनीकों का उपयोग ही किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।



