मध्य प्रदेश में भीषण जल संकट: देवास जिले के ग्राम खेरिया जागीर में सूखे बोरिंग-कुएं, किसान टैंकर से कर रहे सिंचाई

देवास। मध्य प्रदेश में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। कम बारिश और लगातार गिरते भू-जल स्तर का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। देवास जिले के सोनकच्छ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खेरिया जागीर में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए निजी टैंकरों से पानी मंगवाने को मजबूर हैं। वहीं ग्रामीणों के सामने पीने के पानी की व्यवस्था करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।

गांव के लोगों का कहना है कि इस वर्ष सामान्य से कम बारिश होने के कारण भू-जल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका सबसे अधिक असर गांव के जल स्रोतों पर पड़ा है। गांव में मौजूद अधिकांश बोरिंग, कुएं और बाड़ियां सूख चुकी हैं, जिससे खेती और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

70 प्रतिशत से अधिक जल स्रोत हुए सूखे

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम खेरिया जागीर में करीब 70 प्रतिशत से अधिक बोरिंग, कुएं और पारंपरिक जल स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं। जिन जल स्रोतों से वर्षों तक सिंचाई और पेयजल की जरूरतें पूरी होती थीं, वे अब जलविहीन हो चुके हैं। इससे किसानों के सामने रबी फसलों को बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

जल स्रोतों के सूखने के कारण किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए निजी टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और किसानों की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

फसलों को बचाने के लिए टैंकर से कर रहे सिंचाई

गांव के कई किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसलों को बचाने के लिए निजी टैंकरों से पानी खरीदकर खेतों में सिंचाई कर रहे हैं। खासकर लहसुन और प्याज जैसी नकदी फसलों पर जल संकट का सबसे अधिक असर देखने को मिल रहा है।

किसानों का कहना है कि यदि समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिला तो फसल उत्पादन में भारी गिरावट आएगी, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। सिंचाई के लिए बार-बार टैंकर मंगवाने से लागत कई गुना बढ़ गई है, जबकि फसल से मिलने वाले लाभ पर भी संकट मंडरा रहा है।

किसानों ने बयां किया अपना दर्द

किसान बाबूलाल मीणा, दिनेश गिरी, गोकल सिंह राजपूत ने बताया की पिछले कई वर्षों से खेती कर रहे हैं। लेकिन ऐसी पानी की किल्लत पहले कभी नहीं देखी लसन प्याज़ की फसल को पानी नहीं मिलने से नुकसान हो रहा है।

किसानों ने बताया कि इस बार हालात बेहद खराब हैं। गांव के अधिकांश बोरिंग और कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं। मजबूरी में उन्हें निजी टैंकरों से पानी मंगवाकर फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खर्च लगातार बढ़ रहा है।

किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो उनकी मेहनत से तैयार पूरी फसल बर्बाद हो सकती है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

पीने के पानी की भी बढ़ी चिंता

खेती के साथ-साथ गांव में पेयजल संकट भी लगातार गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पीने के पानी के लिए भी जुगाड़ करना पड़ रहा है। कई परिवार दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जब किसानों को अपनी फसलों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तब आम लोगों के लिए स्वच्छ पेयजल की स्थिति कितनी गंभीर होगी, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

प्रशासन से की समाधान की मांग

ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में बढ़ते जल संकट को देखते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते पेयजल और सिंचाई की व्यवस्था नहीं की गई तो फसलों के साथ-साथ ग्रामीणों का जनजीवन भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

ग्रामीणों ने भू-जल संरक्षण, वैकल्पिक जल स्रोतों की व्यवस्था, टैंकरों के माध्यम से नियमित पेयजल आपूर्ति तथा जल संरक्षण से जुड़े दीर्घकालिक उपाय लागू करने की मांग की है।

लगातार कम बारिश बनी बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार लगातार कम वर्षा, भू-जल का अत्यधिक दोहन और पर्याप्त जल संरक्षण के अभाव में मध्य प्रदेश के कई जिलों में भू-जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। देवास जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है, जहां गर्मी शुरू होने से पहले ही जल स्रोत सूखने लगे हैं।

यदि आने वाले समय में जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण की दिशा में प्रभावी प्रयास नहीं किए गए, तो जल संकट और गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे में किसानों की खेती, ग्रामीणों की आजीविका और पेयजल व्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है

ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द ही जल संकट से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि उनकी फसलें नष्ट होने से बच सकें। सोचने वाली बात ऐ भी है की जब किसानों को अपनी फसलो के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है तो आखिर पिने के पानी की क्या स्थिति होगी…?