मौत का कुआं बना 8 लोगों की जान का दुश्मन: खंडवा के कोंडावद गांव में मीथेन गैस से दम घुटने से 8 ग्रामीणों की मौत

खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। गणगौर विसर्जन से पहले कुएं की सफाई के दौरान जहरीली मीथेन गैस की चपेट में आने से 8 ग्रामीणों की मौत हो गई। यह हादसा छैगांवमाखन क्षेत्र के कोंडावद गांव में गुरुवार शाम करीब 4 बजे हुआ, जहां एक के बाद एक लोगों के कुएं में उतरने से सभी जहरीली गैस के प्रभाव से बेहोश होकर कुएं में ही फंस गए।

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी शवों को कुएं से बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल खंडवा भेजा गया।

गणगौर विसर्जन से पहले हो रही थी कुएं की सफाई

ग्रामीणों के अनुसार गांव में गणगौर विसर्जन का कार्यक्रम आयोजित होना था। विसर्जन से पहले गांव के पुराने कुएं की सफाई की जा रही थी ताकि धार्मिक कार्यक्रम में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

शाम करीब 4 बजे सबसे पहले राकेश और अनिल कुएं में उतरकर कीचड़ और कचरा निकालने लगे। कुछ देर तक सफाई का काम चलता रहा, लेकिन अचानक दोनों की तबीयत बिगड़ गई और वे कुएं के भीतर बेहोश होकर गिर पड़े।

बचाने उतरे लोग भी बन गए हादसे का शिकार

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब ऊपर खड़े लोगों ने देखा कि दोनों युवक बेहोश हो गए हैं, तो उन्हें बचाने के लिए एक-एक कर अन्य ग्रामीण कुएं में उतरते गए।

लेकिन कुएं के अंदर मौजूद जहरीली मीथेन गैस के कारण नीचे उतरने वाला हर व्यक्ति कुछ ही क्षणों में बेहोश हो गया। रस्सियों का सहारा लेने के बावजूद कोई भी बाहर नहीं निकल सका और सभी कुएं में ही गिरते चले गए।

कुछ ही मिनटों में यह बचाव प्रयास एक बड़े हादसे में बदल गया और कुल 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

चार घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और बचाव दल मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक प्रयास में क्रेन की मदद से लोगों को निकालने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली।

इसके बाद सुरक्षा उपकरण और ऑक्सीजन मास्क पहनकर रेस्क्यू टीम कुएं में उतरी। रस्सियों की सहायता से सभी शवों को एक-एक कर बाहर निकाला गया। पूरे रेस्क्यू अभियान में लगभग चार घंटे का समय लगा और रात करीब 8:15 बजे तक सभी शवों को बाहर निकाल लिया गया।

इसके बाद शवों को जिला अस्पताल खंडवा भेजा गया, जहां रात में ही पोस्टमार्टम किया गया।

27 फीट गहरे कुएं में भरी थी कीचड़

ग्रामीणों के अनुसार हादसा जिस कुएं में हुआ वह लगभग 27 फीट गहरा था। कुएं के भीतर करीब 5 से 6 फीट तक कीचड़ और कचरा जमा था, जिससे जहरीली गैस बनने की संभावना बढ़ गई थी।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुएं से तेज दुर्गंध आ रही थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि अंदर इतनी मात्रा में जहरीली गैस मौजूद है।

हादसे में इन लोगों की हुई मौत

ग्रामीणों ने बताया कुआं 27 फीट गहरा है। इसमें 5 से फीट तक कीचड़ व कचरा भरा था।

मरने वालों में कोंडावद निवासी वासुदेव उर्फ बलिराम पिता आत्माराम (40), उनका भतीजा राकेश पिता हरि (23), पूर्व सरपंच मोहन पिता मंशाराम (55), अनिल पिता आत्माराम (30), शरण पिता सुखराम (38), अर्जुन पिता गोविंद (33) और उसका चचेरा भाई गजानंद पिता गोपाल (25) व अजय पिता मोहन (26) शामिल हैं।

गांव में एक साथ आठ लोगों की मौत से मातम पसर गया और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कैसे हुआ हादसा

प्रत्यक्षदर्शी सालकराम और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि सबसे पहले राकेश और अनिल सफाई के लिए कुएं में उतरे थे। कुछ समय बाद वे अचानक बेहोश होकर गिर गए। उन्हें बचाने की कोशिश में अन्य ग्रामीण भी नीचे उतरते गए, लेकिन जहरीली गैस की चपेट में आने से सभी एक-एक कर बेहोश होते चले गए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते गैस की मौजूदगी का पता चल जाता या पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध होते, तो शायद इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी।

मुख्यमंत्री ने जताया शोक, आर्थिक सहायता की घोषणा

घटना पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रत्येक मृतक के परिवार को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए।

मौके पर कलेक्टर ऋषव गुप्ता और पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय भी पहुंचे और पूरे राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी की।

कुएं की सफाई के दौरान बरतें सावधानी

विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक बंद या गंदे पड़े कुओं में मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसें जमा हो सकती हैं। ऐसे कुओं की सफाई बिना गैस जांच, ऑक्सीजन की उपलब्धता और सुरक्षा उपकरणों के नहीं करनी चाहिए।

यह हादसा इस बात की गंभीर चेतावनी है कि पारंपरिक जल स्रोतों की सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना कितना आवश्यक है। थोड़ी सी लापरवाही कई परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन सकती है।