नेमावर घाट पर एक साथ जलीं 18 चिताएं: गुजरात पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में जान गंवाने वाले मजदूरों को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

देवास। गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में जान गंवाने वाले मध्य प्रदेश के मजदूरों को देवास जिले के नेमावर नर्मदा घाट पर नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। हादसे में मृत 20 लोगों में से पहचान हो चुके 18 शवों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। एक साथ 18 चिताएं जलने का यह दृश्य बेहद भावुक और हृदयविदारक था, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।

हादसे में मृत अधिकांश मजदूर देवास जिले के संदलपुर, हरदा जिले के हंडिया तथा खातेगांव क्षेत्र के निवासी थे। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में परिजन, ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल मौजूद रहे।

गुजरात की पटाखा फैक्ट्री में हुआ था भीषण विस्फोट

गुजरात के बनासकांठा जिले के डीसा के निकट स्थित पटाखा फैक्ट्री में मंगलवार सुबह करीब 8 बजे बॉयलर फटने से जोरदार विस्फोट हुआ था। धमाका इतना भीषण था कि फैक्ट्री में काम कर रहे कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए।

प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई मजदूरों के शव क्षत-विक्षत हो गए और उनके शरीर के अंग करीब 50 मीटर दूर तक जा गिरे। फैक्ट्री के पीछे स्थित खेतों से भी मानव अंग बरामद किए गए, जिससे हादसे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

20 लोगों की हुई मौत

इस दर्दनाक हादसे में कुल 20 लोगों की मौत हुई, जिनमें 5 से 8 वर्ष तक के बच्चे भी शामिल थे। मृतकों में अधिकांश मजदूर मध्य प्रदेश के हरदा और देवास जिले के रहने वाले थे, जो रोजगार के लिए गुजरात में काम कर रहे थे।

हादसे में देवास जिले के संदलपुर के 9 मजदूर, हरदा जिले के हंडिया के 8 मजदूर तथा खातेगांव के एक ठेकेदार की जान चली गई। वहीं, हादसे में घायल 8 मजदूरों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा था, जिनमें से 3 की हालत गंभीर बताई गई थी।

नेमावर घाट पर हुआ सामूहिक अंतिम संस्कार

गुरुवार को पहचान हो चुके 18 मृतकों के शव नेमावर स्थित नर्मदा घाट लाए गए, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

देवास जिले के संदलपुर निवासी मजदूरों के शव पहले उनके पैतृक गांव पहुंचाए गए, जहां परिजनों और ग्रामीणों ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद सभी शवों को नेमावर घाट लाया गया।

वहीं हरदा जिले के हंडिया क्षेत्र के मृतकों के शव गुजरात से सीधे नेमावर घाट पहुंचाए गए, जहां एक साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।

दो शवों की पहचान के लिए कराया गया डीएनए टेस्ट

विस्फोट इतना भीषण था कि दो शवों की तत्काल पहचान संभव नहीं हो सकी। इसके लिए प्रशासन द्वारा डीएनए परीक्षण कराया गया।

जांच के बाद एक शव की पहचान लक्ष्मीबेन अनिल भाई नायक (उम्र 50 वर्ष), निवासी हंडिया, जिला हरदा के रूप में हुई। जबकि उस समय एक अन्य शव की पहचान की प्रक्रिया जारी थी।

पूरे क्षेत्र में पसरा मातम

नेमावर घाट पर एक साथ 18 चिताओं के जलने का दृश्य बेहद मार्मिक था। अपने परिजनों को अंतिम विदाई देते समय कई परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल था।

स्थानीय लोगों ने बताया कि एक साथ इतने लोगों की अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार का दृश्य उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। पूरे क्षेत्र में शोक और मातम का माहौल बना रहा।

प्रशासन और पुलिस रही मौजूद

अंतिम संस्कार के दौरान स्थानीय प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पूरे समय मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ अंतिम संस्कार की सभी व्यवस्थाओं की निगरानी भी प्रशासन द्वारा की गई ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर दूसरे राज्यों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। विशेषज्ञों का मानना है कि पटाखा फैक्ट्रियों जैसे संवेदनशील उद्योगों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

यदि सुरक्षा उपकरण, नियमित निरीक्षण और पर्याप्त प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए तो इस प्रकार के बड़े औद्योगिक हादसों की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है।