सोनकच्छ में बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की फसलें संकट में आ गई हैं। प्री-मानसून और मानसून की शुरुआती बारिश के बाद पिछले 12 दिनों से क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। तेज धूप और लगातार बढ़ते तापमान से खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है, जिससे सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलें मुरझाने लगी हैं।
किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों की बढ़वार प्रभावित होगी और उत्पादन पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
सोयाबीन में पीला मोजेक बीमारी का खतरा बढ़ा

किसानों के अनुसार लगातार सूखे जैसे हालात और तेज धूप के कारण सोयाबीन की फसल में पीला मोजेक (Yellow Mosaic Disease) फैलने का खतरा बढ़ गया है। यह बीमारी मुख्य रूप से सफेद मक्खी (Whitefly) के माध्यम से फैलती है और पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। इससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है तथा उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि बारिश में अधिक अंतराल हो और तापमान लगातार ऊंचा बना रहे तो इस बीमारी के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में किसानों को नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करते रहना चाहिए।
किसानों की बढ़ी चिंता

किसान दिनेश धाकड़ और विक्रम सिंह नागर ने बताया कि शुरुआती बारिश से अच्छी उम्मीद बनी थी और समय पर बोवनी भी हो गई थी, लेकिन पिछले 12 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण अब फसलें प्रभावित होने लगी हैं।
उन्होंने कहा कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। खेतों की मिट्टी तेजी से सूख रही है और पौधों की बढ़वार भी रुकने लगी है।
तेज धूप से खत्म हो रही खेतों की नमी
लगातार तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण खेतों की सतह से नमी तेजी से समाप्त हो रही है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहां स्थिति और अधिक गंभीर होती जा रही है।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय सोयाबीन की फसल को पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है। लंबे समय तक वर्षा नहीं होने से पौधों की जड़ें कमजोर होने लगती हैं और रोगों का प्रकोप भी बढ़ सकता है।
मानसूनी बीमारियों का भी खतरा
बारिश के लंबे अंतराल और बदलते मौसम के कारण फसलों में कीट एवं रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा मौसम में उतार-चढ़ाव से वायरल संक्रमण और अन्य मानसूनी बीमारियां भी बढ़ सकती हैं।
मौसम विभाग क्या कहता है?
मौसम विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियां फिलहाल कमजोर हुई हैं। हालांकि आगामी कुछ दिनों में मानसून के फिर सक्रिय होने की संभावना जताई गई है। यदि ऐसा होता है तो किसानों को राहत मिल सकती है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह
- खेतों का नियमित निरीक्षण करें।
- सफेद मक्खी और अन्य कीटों पर नजर रखें।
- पीला मोजेक के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विभाग या कृषि वैज्ञानिक से सलाह लें।
- अनावश्यक रासायनिक दवाओं का छिड़काव करने से बचें।
- बारिश होने तक नमी संरक्षण के उपाय अपनाएं।
यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर पड़ेगा असर
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इस समय अच्छी बारिश होना बेहद जरूरी है। यदि मानसून की बेरुखी कुछ और दिनों तक जारी रही तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर व्यापक असर पड़ सकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होगी।



