टोल वसूली पूरी, सुरक्षा अधूरी! सोनकच्छ देवास हाईवे पर धंसे शोल्डर और जलभराव बन रहे हादसों की वजह

सोनकच्छ देवास हाईवे

सोनकच्छ (देवास)। इंदौर-भोपाल फोरलेन हाईवे के सोनकच्छ देवास हाईवे पर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लगातार बारिश के बीच इस मार्ग के कई हिस्सों में साइड शोल्डर धंस गए हैं, जबकि कई स्थानों पर सड़क पर जलभराव की समस्या बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन इस मार्ग से लाखों रुपये का टोल वसूला जाता है, लेकिन सड़क की सुरक्षा और नियमित रखरखाव पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा। बारिश के दौरान यह लापरवाही वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

धंसे शोल्डर बन रहे दुर्घटनाओं की बड़ी वजह

सोनकच्छ देवास हाईवे मार्ग पर कई स्थानों पर सड़क किनारे बने साइड शोल्डर बारिश के कारण बुरी तरह धंस चुके हैं। मिट्टी बह जाने से सड़क और शोल्डर के बीच कई इंच का अंतर बन गया है।

ऐसी स्थिति में यदि किसी वाहन का पहिया मुख्य सड़क से नीचे उतर जाता है तो उसे दोबारा सड़क पर लाना बेहद मुश्किल हो जाता है। विशेष रूप से तेज गति से चलने वाले चारपहिया वाहन, बसें और ट्रक असंतुलित होकर दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं।

स्थानीय वाहन चालकों का कहना है कि रात के समय यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हिस्से स्पष्ट दिखाई नहीं देते।

गंधर्वपुरी फाटा से मंडी गेट तक जलभराव ने बढ़ाई परेशानी

सोनकच्छ देवास हाईवे

लगातार बारिश के दौरान गंधर्वपुरी फाटा, घट्टिया भाना फाटा और कृषि उपज मंडी गेट के सामने सड़क पर पानी भर जाता है।

जलभराव के कारण सड़क पर बने गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन अचानक संतुलन खो बैठते हैं। कई बार पानी सड़क के बीच तक जमा होने से यातायात भी प्रभावित होता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर वर्ष यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित नहीं की गई। बारिश के बाद केवल औपचारिक मरम्मत कर समस्या को अगले मानसून तक टाल दिया जाता है।

क्या कहते हैं सड़क सुरक्षा के तकनीकी मानक?

भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के सड़क डिजाइन मानकों के अनुसार, साइड शोल्डर सड़क की सतह के लगभग बराबर होना चाहिए, ताकि किसी आपात स्थिति में वाहन सुरक्षित रूप से सड़क से उतरकर दोबारा मुख्य मार्ग पर आ सके।

यदि शोल्डर सड़क से काफी नीचे धंस जाए तो वाहन दोबारा सड़क पर चढ़ाते समय पलट सकता है या चालक नियंत्रण खो सकता है। यही कारण है कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर शोल्डर का नियमित रखरखाव सड़क सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

हर दिन गुजरते हैं हजारों वाहन

सोनकच्छ देवास हाईवे मार्ग इंदौर-भोपाल हाईवे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मार्ग से प्रतिदिन—

  • निजी कारें
  • दोपहिया वाहन
  • यात्री बसें
  • स्कूल बसें
  • एम्बुलेंस
  • भारी मालवाहक ट्रक
  • कृषि उपज लेकर आने वाले वाहन गुजरते हैं।

सोनकच्छ देवास हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर सड़क की खराब स्थिति किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

टोल वसूली के साथ रखरखाव भी जरूरी

राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण की लागत की भरपाई करना नहीं, बल्कि सड़क का नियमित रखरखाव, सुरक्षा सुविधाएं, संकेतक, जल निकासी और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराना भी होता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि वाहन चालक निर्धारित टोल शुल्क चुका रहे हैं तो उन्हें सुरक्षित और बेहतर सड़क भी मिलनी चाहिए।

पहले भी उठते रहे हैं सड़क सुरक्षा के मुद्दे

सोनकच्छ क्षेत्र में पिछले कुछ समय से सड़क सुरक्षा से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में समाचार24 ने इसी मार्ग पर धंसे शोल्डर और जलभराव को लेकर खबर प्रकाशित की थी। इससे पहले पीलिया खाल, नए पुल और वर्षा के दौरान जलभराव जैसी समस्याओं को लेकर भी स्थानीय लोगों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर सड़कों का रखरखाव और जल निकासी व्यवस्था मजबूत न की जाए तो मानसून के दौरान दुर्घटनाओं का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

स्थानीय नागरिकों की प्रमुख मांगें

स्थानीय लोगों ने संबंधित एजेंसी, टोल प्रबंधन और प्रशासन से मांग की है कि—

  • पूरे सोनकच्छ देवास हाईवे मार्ग का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
  • धंसे हुए शोल्डर की तकनीकी मानकों के अनुसार मरम्मत की जाए।
  • जलभराव वाले स्थानों पर स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाए।
  • सड़क पर बने गड्ढों की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
  • दुर्घटना संभावित स्थानों पर रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा संकेतक लगाए जाएं।
  • नियमित निरीक्षण कर मानसून के दौरान विशेष निगरानी रखी जाए।

टोल प्रबंधन ने क्या कहा?

नेवरी फाटा टोल के मैनेजर शिव कुमार शर्मा ने बताया—

“करीब 150 किलोमीटर क्षेत्र में गड्ढों की मरम्मत और सड़क रिपेयरिंग का कार्य चल रहा है। हालांकि सोनकच्छ देवास हाईवे और उसके आसपास का काम कब तक पूरा हो पाएगा, यह अभी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।”

सड़क सुरक्षा पर विशेषज्ञों की राय

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान धंसे शोल्डर, जलभराव और गड्ढे दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। यदि सड़क की नियमित तकनीकी जांच और समय पर मरम्मत नहीं की जाए तो दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सड़क की गुणवत्ता के साथ-साथ जल निकासी व्यवस्था, रिफ्लेक्टिव मार्किंग और चेतावनी संकेत भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, विशेषकर हाईवे जैसे तेज गति वाले मार्गों पर।

समय रहते सुधार जरूरी

स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल टोल वसूली करना पर्याप्त नहीं है। सड़क उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना भी संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी है। यदि बारिश के मौसम में धंसे शोल्डर, जलभराव और गड्ढों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी बड़े सड़क हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।