कालीसिंध नदी पाथवे निर्माण में गड़बड़ी, 43 लाख का काम पूरा होने से पहले ही उखड़ा

कालीसिंध नदी पाथवे निर्माण

सोनकच्छ। कालीसिंध नदी पाथवे निर्माण में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। देवास जिले के सोनकच्छ स्थित पिपलेश्वर घाट पर अमृत 2.0 योजना के तहत करीब 43 लाख रुपये की लागत से बनाए जा रहे पाथवे एवं घाट निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय प्रबुद्धजनों ने नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) अमरदास सेनानी को शिकायत सौंपकर निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। आरोप है कि निर्माण कार्य अभी पूर्ण भी नहीं हुआ, लेकिन पाथवे पर लगे पेवर ब्लॉक धंसने और टूटने लगे हैं, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और कार्य की निगरानी पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

अमृत 2.0 योजना के तहत हो रहा है निर्माण

कालीसिंध नदी पाथवे निर्माण

कालीसिंध नदी पाथवे निर्माण अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत कराया जा रहा है। नगर के पिपलेश्वर घाट पर रेड स्टोन लगाने, गेबियन वॉल (Gabion Wall) तथा लगभग 90 मीटर लंबे और ढाई मीटर चौड़े पाथवे का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना की मूल स्वीकृत लागत लगभग 49 लाख रुपये थी, लेकिन ठेका भोपाल की रॉयल इंडिया कंपनी ने करीब 11 प्रतिशत कम दर पर लगभग 43 लाख रुपये में लिया था।

इस परियोजना का उद्देश्य पिपलेश्वर घाट को अधिक सुरक्षित, आकर्षक और व्यवस्थित बनाना है ताकि धार्मिक, सामाजिक और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। हालांकि अब निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों ने पूरी परियोजना पर चर्चा शुरू कर दी है।

निर्माण पूरा होने से पहले ही धंस गया पाथवे

स्थानीय लोगों का कहना है कि कालीसिंध नदी पाथवे निर्माण अभी पूरी तरह पूरा भी नहीं हुआ है और आम लोगों के लिए शुरू भी नहीं किया गया, लेकिन इसके बावजूद पाथवे कई स्थानों पर धंस गया है। कई पेवर ब्लॉक टूट चुके हैं और कुछ स्थानों पर बैठ गए हैं।

प्रबुद्धजनों का आरोप है कि यदि निर्माण के शुरुआती चरण में ही यह स्थिति है तो भविष्य में लोगों की सुरक्षा पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। उनका कहना है कि किसी भी सार्वजनिक निर्माण कार्य की मजबूती उसकी नींव और गुणवत्ता पर निर्भर करती है। यदि शुरुआती दौर में ही निर्माण खराब होने लगे तो करोड़ों रुपये की सरकारी योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित होता है।

रेड स्टोन की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

रेड स्टोन की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि घाट पर लगाए जा रहे रेड स्टोन भी निर्धारित गुणवत्ता और मोटाई के अनुरूप नहीं हैं। उनका कहना है कि पिछले लगभग दस महीनों से स्टोन लगाने का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है और अब तक पूरा नहीं हो सका है।

निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी शिकायतें पहले भी कई सरकारी परियोजनाओं में सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में तकनीकी परीक्षण और स्वतंत्र जांच यह तय करती है कि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं।

समय सीमा बढ़ने के बाद भी अधूरा काम

फील्ड इंजीनियर उज्ज्वल सजोतिया के अनुसार कालीसिंध नदी पाथवे निर्माण का कार्य नौ माह की अवधि में फरवरी 2026 तक पूरा होना था। बाद में नगर परिषद द्वारा इसकी समय सीमा बढ़ाकर जून 2026 कर दी गई। इसके बावजूद निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा नहीं हो पाया।

बताया गया कि अब तक करीब 1334 वर्गमीटर रेड स्टोन कार्य में से लगभग 890 वर्गमीटर का ही कार्य पूरा हुआ है। वहीं पाथवे के धंसने के बाद उसकी मरम्मत का कार्य किया जा रहा है।

ठेकेदार को 10 बार जारी हो चुका है नोटिस

नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा नहीं करने और अन्य कमियों को लेकर संबंधित ठेकेदार को अब तक करीब 10 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अंतिम नोटिस भी लगभग एक सप्ताह पहले जारी किया गया था।

हालांकि स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि बार-बार नोटिस जारी किए जा रहे थे तो गुणवत्ता की निगरानी समय रहते क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि निर्माण के दौरान नियमित निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण किए जाते तो पाथवे धंसने जैसी स्थिति शायद सामने नहीं आती।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

सिविल इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार किसी भी पाथवे या सार्वजनिक निर्माण में मजबूत बेस तैयार करना, उचित कंपेक्शन (Compaction), गुणवत्ता युक्त सामग्री का उपयोग और निर्धारित मोटाई का पालन करना अनिवार्य होता है। यदि बेस सही तरीके से तैयार नहीं किया जाए तो कुछ ही समय में पेवर ब्लॉक धंसने, टूटने या असमान होने की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

इसी कारण बड़े निर्माण कार्यों में नियमित गुणवत्ता परीक्षण, सामग्री की जांच और विभागीय निरीक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

स्थानीय लोगों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों ने मांग की है कि पूरे कालीसिंध नदी पाथवे निर्माण की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण में उपयोग की गई सामग्री, रेड स्टोन की गुणवत्ता, पाथवे की नींव, कंपेक्शन और भुगतान प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसलिए विकास कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो भविष्य में अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों में भी गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।