देवास हाईटेंशन लाइन हादसा: बेटे के दिव्यांग होने के 4 माह बाद भी FIR नहीं, पिता ने लगाई गुहार

देवास हाईटेंशन लाइन हादसा

देवास। देवास शहर के प्रताप नगर निवासी विष्णु चौरसिया ने अपने पुत्र के साथ हुए गंभीर हादसे के मामले में चार माह बीत जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर कार्यालय में आवेदन सौंपा है। उन्होंने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर एफआईआर दर्ज कराने और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित पिता का कहना है कि उनके पुत्र के साथ कार्य के दौरान हुआ हादसा उसकी पूरी जिंदगी बदल गया। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल होने के साथ स्थायी रूप से दिव्यांग हो गया, लेकिन अब तक पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने से परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

12 फरवरी को हुआ था हादसा

आवेदन के अनुसार, विष्णु चौरसिया का पुत्र 12 फरवरी 2026 को देवास स्थित मुच्छाल इंडस्ट्रीज द्वारा निर्मित एक मकान में कार्य कर रहा था। इसी दौरान वहां नीचे की ओर झूल रही हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से झुलस गया।

परिजनों के अनुसार, घटना इतनी भयावह थी कि युवक के सिर में गंभीर चोट आई, एक पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और हाथ की तीन अंगुलियां काटनी पड़ीं। इसके अलावा सिर की प्लास्टिक सर्जरी भी करानी पड़ी। लंबे उपचार के बाद भी उसकी शारीरिक स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है और वह अब दिव्यांग हो चुका है।

अभी भी जारी है इलाज

पीड़ित परिवार का कहना है कि हादसे के कई महीने बाद भी युवक का उपचार जारी है। लगातार इलाज, ऑपरेशन और दवाइयों के कारण परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। परिवार का आरोप है कि हादसे के बाद से ही वे न्याय और कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

चार माह से एफआईआर दर्ज नहीं होने का आरोप

विष्णु चौरसिया ने आरोप लगाया है कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने मामले की शिकायत सिविल लाइन थाना में की थी, लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

उन्होंने यह भी बताया कि मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी की गई थी, लेकिन वहां से भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर लिखित आवेदन देकर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

कलेक्टर से की यह मांग

अपने आवेदन में विष्णु चौरसिया ने मांग की है कि—

  • मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए।
  • हादसे के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जाए।
  • दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
  • परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

निर्माण स्थलों पर सुरक्षा नियमों का पालन क्यों जरूरी?

निर्माण कार्य के दौरान बिजली लाइनों के आसपास काम करना अत्यंत जोखिमपूर्ण माना जाता है। ऐसे मामलों में सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार—

  • हाईटेंशन लाइन के आसपास पर्याप्त सुरक्षित दूरी रखी जानी चाहिए।
  • निर्माण स्थल पर सुरक्षा बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाने चाहिए।
  • श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
  • यदि बिजली लाइन कार्य क्षेत्र के अत्यधिक निकट हो तो संबंधित बिजली कंपनी से समन्वय कर आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।

लापरवाही की स्थिति में गंभीर दुर्घटनाएं होने के साथ-साथ कानूनी जिम्मेदारी भी तय हो सकती है।

विद्युत दुर्घटनाओं को लेकर क्या कहते हैं नियम?

विद्युत सुरक्षा से जुड़े मामलों में यदि किसी व्यक्ति की लापरवाही, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन या आवश्यक सावधानी नहीं बरतने के कारण दुर्घटना होती है, तो मामले की जांच के आधार पर संबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्रत्येक मामले में जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर निगाह

पीड़ित परिवार द्वारा कलेक्टर कार्यालय में आवेदन दिए जाने के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन मामले में क्या कदम उठाता है। यदि जांच में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल न्याय प्राप्त करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है।