सोनकच्छ (देवास)। हर मास एक उपवास अभियान के तहत मंगलवार को देवास जिले के सोनकच्छ स्थित कृषि उपज मंडी परिसर में एक ऐतिहासिक धार्मिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज, कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा, योग गुरु बाबा रामदेव के अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों, मोटिवेशनल स्पीकर उज्ज्वल पाटनी, जनप्रतिनिधियों और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। इस अवसर पर हजारों लोगों ने “हर मास एक उपवास” का संकल्प लेकर स्वस्थ, संयमित और सकारात्मक जीवन जीने का प्रण लिया।
कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वास्थ्य, आत्म-अनुशासन, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक जीवनशैली को अपनाने का एक सामाजिक अभियान बन गया।
सोनकच्छ में बना नया इतिहास, हजारों लोगों ने लिया संकल्प

कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित इस विशाल कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंच से सभी उपस्थित लोगों ने तख्ती उठाकर “हर मास एक उपवास” अभियान का सामूहिक संकल्प लिया। आयोजन समिति के अनुसार यह अभियान लोगों को नियमित उपवास के माध्यम से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ बनाने का प्रयास है।
श्रद्धालुओं ने एक स्वर में हर महीने कम से कम एक दिन उपवास रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह का वातावरण देखने को मिला।
“ठान लो तो जीत है, मान लो तो हार” — आचार्य प्रसन्न सागरजी

अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि व्यक्ति यदि स्वयं पर विश्वास कर ले, तो संसार में कोई भी कार्य असंभव नहीं है।
उन्होंने कहा—
“ठान लो तो जीत है और मान लो तो हार है। व्यक्ति को स्वयं पर आत्मविश्वास रखना चाहिए कि वह संसार में कुछ भी कर सकता है, लेकिन अति-आत्मविश्वास से हमेशा बचना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य छोटी-छोटी परेशानियों से घबरा जाता है, जबकि यदि मन मजबूत हो तो कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना भी सहजता से किया जा सकता है।
उपवास केवल भूखे रहने का नाम नहीं, जीवनशैली बदलने का माध्यम
आचार्य प्रसन्न सागरजी ने कहा कि उपवास का वास्तविक उद्देश्य केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि मन, विचार और व्यवहार को शुद्ध करना है।
उन्होंने कहा कि साधु-संत 24 घंटे में केवल एक बार भोजन ग्रहण करते हैं और प्रतिदिन 25 से 30 किलोमीटर तक पैदल चल लेते हैं। दूसरी ओर आज का सामान्य व्यक्ति दिनभर कई बार भोजन करता है, लेकिन थोड़ी दूरी पैदल चलने में भी कठिनाई महसूस करता है।
उन्होंने कहा कि—
“हमें मनुष्य जीवन को कोहिनूर हीरे की तरह मिला है। इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। जब मन अच्छा होता है तो भगवान भी अच्छे लगते हैं और जब मन नकारात्मक हो जाता है तो भगवान भी दूर दिखाई देने लगते हैं।”
“हर मास एक उपवास” अभियान का उद्देश्य क्या है?
कार्यक्रम में बताया गया कि हर मास एक उपवास अभियान का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, अनावश्यक खान-पान पर नियंत्रण रखने और मानसिक संतुलन विकसित करने के लिए प्रेरित करना है।
आचार्य प्रसन्न सागरजी ने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति महीने में केवल एक दिन भी संयम रखे, तो वह अपने शरीर को अनेक बीमारियों से बचा सकता है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता का सुंदर संगम बताया।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने किया अभियान का समर्थन

कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि योग की तरह यह अभियान भी पूरे देश और विश्व तक पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि योग को जिस प्रकार बाबा रामदेव ने घर-घर तक पहुंचाया, उसी प्रकार “हर मास एक उपवास” का संदेश भी प्रत्येक परिवार तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव की उपासना में उपवास का विशेष महत्व है और वास्तविक उपवास का अर्थ केवल भोजन त्यागना नहीं, बल्कि ईश्वर के निकट रहना है।
पंडित मिश्रा ने यह भी कहा कि वे अपनी शिव महापुराण कथा के माध्यम से भी लोगों को इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगे।
उज्ज्वल पाटनी ने सकारात्मक सोच पर दिया जोर
प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर उज्ज्वल पाटनी ने कहा कि आज सबसे अधिक आवश्यकता सकारात्मक सोच विकसित करने की है।
उन्होंने कहा—
“भोजन का उपवास शरीर के लिए, मोबाइल का उपवास मन के लिए और नकारात्मकता का उपवास पूरे जीवन के लिए आवश्यक है।”
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि मोबाइल का उपयोग साधन के रूप में करें, उसे जीवन का स्वामी न बनने दें।
संतों ने बताया— स्वस्थ समाज का आधार है संयम
कार्यक्रम में उपाध्याय मुनि श्री पीयूष सागरजी महाराज ने भी प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संयम और अनुशासन ही स्वस्थ समाज की नींव हैं।
संतों ने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी जीवनशैली में थोड़ा-सा भी संयम लाता है, तो कई सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं स्वतः समाप्त हो सकती हैं।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत सोनल बाकलीवाल के मंगलाचरण से हुई। संघ की ओर से मुनि नेगम सागरजी महाराज ने गुरुवंदना प्रस्तुत की।
इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर मंच पर सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक डॉ. राजेश सोनकर, माधव एवं न्यास ट्रस्टी प्रदीप पांडे, जैन समाज अध्यक्ष महेंद्र पाटोदी, पुष्पगिरी तीर्थ अध्यक्ष प्रकाश अजमेरा, अंतर्मना संघपति दिलीप हुमड़, पतंजलि के एस.के. तिजारा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
अतिथियों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने सभी अतिथियों का मोतियों की माला पहनाकर सम्मान किया तथा आशीर्वाद प्रदान किया।
पंडित प्रदीप मिश्रा को भी गुरुदेव द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया।
उपवास के स्वास्थ्य लाभ भी बताए
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों और संतों ने बताया कि समय-समय पर किया गया उपवास शरीर को विश्राम देता है। इससे पाचन तंत्र बेहतर कार्य करता है, शरीर की सफाई होती है तथा आत्म-अनुशासन विकसित होता है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार का उपवास व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य और चिकित्सकीय स्थिति को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति गंभीर बीमारी से पीड़ित है तो चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।
समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की पहल
आयोजकों का कहना है कि “हर मास एक उपवास” अभियान केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य, संयम, सदाचार और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का एक जनआंदोलन है।
हजारों लोगों द्वारा एक साथ लिया गया संकल्प यह संदेश देता है कि यदि समाज सामूहिक रूप से किसी अच्छे उद्देश्य के लिए आगे बढ़े, तो सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
अब अभियान को घर-घर पहुंचाने का लक्ष्य
कार्यक्रम के अंत में संतों और अतिथियों ने लोगों से आग्रह किया कि वे स्वयं भी हर महीने एक उपवास करें और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज के अन्य लोगों को भी इस अभियान से जोड़ें।
आयोजकों ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह अभियान पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में स्वास्थ्य और आध्यात्मिक जागरूकता का एक बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।



