देव बड़ला – बाबा विलवेश्वर महादेव जलमग्न, मां नेवज ने किया प्राकृतिक जलाभिषेक; मानसून में निखरा विंध्याचल का सौंदर्य

देव बड़ला बाबा विलवेश्वर महादेव

देव बड़ला (सीहोर)। मध्यप्रदेश में मानसून की सक्रियता के साथ ही प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम एक बार फिर देव बड़ला की तपोभूमि पर देखने को मिल रहा है। सीहोर जिले की जावर तहसील स्थित मां नेवज नदी के उद्गम स्थल और ऐतिहासिक धरोहर देव बड़ला में लगातार हो रही बारिश के कारण प्राचीन देव बड़ला बाबा विलवेश्वर महादेव मंदिर जलमग्न हो गया। स्थानीय श्रद्धालु इसे भगवान शिव का प्राकृतिक जलाभिषेक मान रहे हैं। वहीं चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ों से बहते झरने और घने जंगलों ने इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को और भी आकर्षक बना दिया है।

बारिश के साथ स्वयं हुआ बाबा विलवेश्वर महादेव का जलाभिषेक

देव बड़ला बाबा विलवेश्वर महादेव

मंदिर समिति के अध्यक्ष ओंकार सिंह भगत ने बताया कि वर्षा ऋतु की शुरुआत से ही क्षेत्र में अच्छी बारिश हो रही है। लगातार वर्षा के कारण मां नेवज नदी का जलस्तर बढ़ा और उसका पानी बाबा विलवेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंच गया। श्रद्धालु इसे मां नेवज द्वारा भगवान शिव का प्राकृतिक जलाभिषेक मान रहे हैं।

उनके अनुसार इस वर्ष मानसून समय पर सक्रिय होने से पूरे क्षेत्र में हरियाली छा गई है। जंगलों में घास और वनस्पतियां तेजी से विकसित हुई हैं, जिससे वन्यजीवों और पशुओं के लिए भी पर्याप्त चारा उपलब्ध हो गया है।

नेवज नदी के उद्गम स्थल पर बहने लगे झरने

देव बड़ला स्मारक प्रभारी कुंवर विजेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि देव बड़ला को विंध्याचल पर्वत का ‘नाभि स्थल’ भी कहा जाता है। यहां से निकलने वाली अनेक प्राकृतिक जलधाराएं और झरने नीचे जाकर मां नेवज नदी में मिलते हैं।

इस वर्ष मानसून की शुरुआत के साथ ही पहाड़ियों से बहने वाले झरनों में पानी का तेज प्रवाह देखने को मिल रहा है। इससे पूरा क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भर गया है।

धार्मिक आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम

देव बड़ला केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां स्थित हजारों वर्ष पुराने पत्थरों से निर्मित मंदिर भारतीय स्थापत्य कला और प्राचीन शिल्पकला के उत्कृष्ट उदाहरण माने जाते हैं।

बरसात के मौसम में जब चारों ओर हरियाली छा जाती है, पहाड़ों से झरने बहने लगते हैं और मंदिर परिसर तक पानी पहुंच जाता है, तब यह स्थान श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों दोनों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है।

विंध्याचल की गोद में बसा है देव बड़ला

देव बड़ला सीहोर जिले की जावर तहसील में जिला मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित है। यह क्षेत्र विंध्याचल पर्वतमाला के बीच बसा हुआ है और घने जंगलों से घिरा है।

यहां तेंदुआ, जंगली सूअर, हिरण, मोर सहित कई प्रकार के वन्यजीवों की उपस्थिति दर्ज की जाती रही है। बारिश के दौरान जलाशयों के भर जाने से वन्यजीवों को भी पर्याप्त पानी उपलब्ध हो जाता है।

पर्यटन की अपार संभावनाएं

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि देव बड़ला क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और पर्यटन विकास किया जाए, तो यह मध्यप्रदेश के प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।

यहां आने वाले पर्यटकों के लिए ट्रेकिंग, नेचर वॉक, फोटोग्राफी और धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

संरक्षण की आवश्यकता

विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक क्षेत्र का संरक्षण आवश्यक है। नियंत्रित पर्यटन, स्वच्छता, उचित सड़क संपर्क और बुनियादी सुविधाओं के विकास से यहां स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र

देव बड़ला बाबा विलवेश्वर महादेव

मानसून के दौरान जलमग्न बाबा विलवेश्वर महादेव मंदिर, कल-कल बहते झरने, हरियाली से ढकी विंध्याचल पर्वतमालाएं और मां नेवज नदी का उद्गम स्थल मिलकर देव बड़ला को एक अद्भुत आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थल बनाते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में यहां श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों की संख्या बढ़ जाती है।