सोनकच्छ (देवास)। देवास जिले के सोनकच्छ क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सोनकच्छ में बारिश के चलते पिछले 24 घंटे में क्षेत्र में करीब 3 इंच बारिश दर्ज की गई, जिससे कालीसिंध नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ गया। नदी में पानी आने से कई स्थानों पर आवागमन बाधित हो गया, जबकि सोनकच्छ-भागसरा मार्ग पर संपर्क पूरी तरह टूट गया। वहीं सोनकच्छ-जलेरिया मार्ग स्थित पीलिया खाल उफान पर होने के बावजूद लोग अपनी जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से निकलते रहे।
बारिश के कारण कई ग्रामीण मार्ग बंद हो गए हैं और कुछ गांवों का एक-दूसरे से संपर्क भी अस्थायी रूप से टूट गया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने और लंबे समय से लंबित पुल निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराने की मांग की है।
कालीसिंध नदी में आया उफान, पीपलेश्वर घाट का डेम छलका

क्षेत्र के ऊपरी हिस्सों में लगातार हुई तेज बारिश का असर कालीसिंध नदी पर साफ दिखाई दिया। नदी का जलस्तर बढ़ने से पीपलेश्वर घाट के समीप बने डेम से पानी बहने लगा। नदी का यह दृश्य देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और आसपास के ग्रामीण घाट पर पहुंचे।
मानसून के दौरान कालीसिंध नदी का जलस्तर बढ़ना सामान्य घटना है, लेकिन लगातार बारिश होने पर नदी किनारे बसे गांवों और निचले क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी जाती है।
पीलिया खाल पर जान जोखिम में डालकर निकलते रहे लोग

बारिश के कारण सोनकच्छ-जलेरिया मार्ग पर स्थित पीलिया खाल उफान पर आ गया। इसके बावजूद कई लोग बाइक और पैदल पानी के तेज बहाव के बीच से गुजरते रहे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक बाइक सवार बहाव में संतुलन खो बैठा, जिसे आसपास मौजूद लोगों ने समय रहते बचा लिया। इसके बाद भी कई लोग छोटे बच्चों को साथ लेकर उफनते पानी को पार करते नजर आए, जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रही।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष मानसून में यहां यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
मीडिया की सूचना के बाद हरकत में आया प्रशासन
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खाल पर पानी बढ़ने के बावजूद शुरुआत में पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। बाद में मीडिया के माध्यम से सूचना मिलने पर एक पुलिस जवान को मौके पर तैनात किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल एक जवान की तैनाती पर्याप्त नहीं है। ऐसे स्थानों पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और जरूरत पड़ने पर आवागमन पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए।
वर्षों से लंबित है पुल निर्माण की मांग
पीलिया खाल पर हर वर्ष बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच कई वर्षों से यहां बड़ी पुलिया या स्थायी पुल बनाने की मांग उठती रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुल का निर्माण हो जाए तो बारिश के दिनों में हजारों ग्रामीणों को राहत मिलेगी और जान जोखिम में डालकर पानी पार करने की मजबूरी समाप्त हो जाएगी।
सोनकच्छ-भागसरा मार्ग रहा बंद
लगातार बारिश के चलते सोनकच्छ से भागसरा गांव जाने वाला मार्ग भी बंद रहा। इसके अलावा आसपास के कई ग्रामीण रास्तों पर पानी भरने से गांवों के बीच आवागमन प्रभावित हुआ।
कई ग्रामीणों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना पड़ा, जबकि कुछ स्थानों पर लोगों को आवश्यक कार्यों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।
कराड़िया कॉलोनी का नया पुल पहली बारिश में ही सवालों के घेरे में

बारिश के दौरान सोनकच्छ की कराड़िया कॉलोनी में बने नए पुल की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही। पहली ही तेज बारिश में पुल के आसपास जलभराव और आवागमन संबंधी समस्याएं सामने आने लगीं।
स्थानीय नागरिकों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए संबंधित विभाग से निरीक्षण और आवश्यक सुधार की मांग की है।
24 घंटे में 53 मिमी बारिश, अब तक 15.04 इंच वर्षा
राजस्व विभाग के अनुसार, शुक्रवार सुबह से शनिवार सुबह तक 53 मिमी (करीब 2.12 इंच) वर्षा दर्ज की गई। वहीं शनिवार सुबह 6 बजे तक पूरे मानसून सीजन में 376 मिमी (करीब 15.04 इंच) वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
जिले में सबसे अधिक वर्षा खातेगांव क्षेत्र में दर्ज की गई, जहां अब तक लगभग 28.8 इंच बारिश हो चुकी है।
मौसम विभाग की चेतावनी के बीच सतर्क रहने की सलाह
मानसून अभी सक्रिय है और आने वाले दिनों में भी क्षेत्र में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि—
- उफनते नालों और पुलियों को पार करने का प्रयास न करें।
- तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
- मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
- बच्चों को जलभराव वाले स्थानों के पास अकेले न जाने दें।
हर मानसून में दोहराई जाती है समस्या
सोनकच्छ क्षेत्र में हर वर्ष मानसून के दौरान कई ग्रामीण मार्ग जलमग्न हो जाते हैं। पीलिया खाल, कालीसिंध नदी और अन्य छोटे नालों पर पुलों की कमी के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी पुल और बेहतर जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए तो हर वर्ष होने वाली इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकती है।



