होपवेल हॉस्पिटल में बड़ा खुलासा: मरीज को दी गई दूषित दवा, पाउडर में पाए गए कीड़े — परिजनों ने की थाने में शिकायत

सोनकच्छ (देवास) सोनकच्छ नगर के समीप स्थित नवीन होपवेल हॉस्पिटल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल में संचालित मेडिकल स्टोर से खरीदी गई दवा में कीड़े पाए जाने का गंभीर आरोप लगा है। मरीज के परिजनों ने इस संबंध में पुलिस थाने पहुंचकर मेडिकल संचालक और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

सोनकच्छ के होपवेल हॉस्पिटल में मरीज को मेडिकल स्टोर से मिली दूषित दवा

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, सोनकच्छ निवासी मनोज सेंधव अपनी पत्नी का उपचार कराने के लिए होपवेल हॉस्पिटल पहुंचे थे। ड्यूटी डॉक्टर ने जांच के बाद कुछ दवाइयाँ लिखीं, जिन्हें मनोज ने अस्पताल परिसर में ही संचालित मेडिकल स्टोर से करीब ₹4000 में खरीदा।

घर लौटने के बाद जब उन्होंने अपनी पत्नी को गायनीकेयर पाउडर और सिरप देना शुरू किया, तो पाउडर के अंदर जीवित कीड़े चलते हुए दिखाई दिए। यह देखकर परिजन दंग रह गए।

मेडिकल संचालक पर अभद्रता का आरोप

शिकायतकर्ता मनोज सेंधव का कहना है कि जब वे दवा लेकर मेडिकल स्टोर पर पहुंचे और खराब दवा दिखाते हुए उसे बदलने की मांग की, तो संचालक ने न केवल दवा वापस लेने से इंकार किया बल्कि उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए भगा दिया।

इसके बाद मनोज ने अस्पताल संचालक से भी शिकायत की, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला।

थाने पहुंचा मामला, जांच शुरू

मामले के बाद मनोज सेंधव अन्य ग्रामीणों के साथ सोनकच्छ पुलिस थाना पहुंचे और अस्पताल संचालक, मेडिकल स्टोर संचालक तथा संबंधित दवा कंपनी के विरुद्ध लिखित आवेदन प्रस्तुत किया।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आवेदन स्वीकार कर मामले की जांच प्रारंभ की। साथ ही संबंधित विभाग द्वारा भी आवश्यक जांच की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

दवा की गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर दवाओं की गुणवत्ता और उनके सुरक्षित भंडारण को लेकर चिंता व्यक्त की गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं का उचित तापमान और निर्धारित परिस्थितियों में भंडारण अत्यंत आवश्यक होता है। यदि इसमें लापरवाही बरती जाए तो दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि किसी दवा में खराबी का कारण निर्माण प्रक्रिया, पैकेजिंग, परिवहन या भंडारण—इनमें से कोई भी हो सकता है। इसका अंतिम निर्धारण केवल संबंधित जांच और प्रयोगशाला परीक्षण के आधार पर ही किया जा सकता है।

जनता की सुरक्षा पर उठे सवाल!

प्रदेश में हाल ही में दूषित दवाइयों से बच्चों की मौत के कई मामले सामने आए हैं।

ऐसे में प्रतिष्ठित अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही सामने आना स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

जनता अब यही पूछ रही है — क्या अब अस्पताल भी मरीजों की जान से खिलवाड़ करने लगे हैं?

स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता सुनिश्चित करना आवश्यक

स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच आवश्यक होती है ताकि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई हो तो उसकी जिम्मेदारी तय की जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

आगे की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल पुलिस और फार्मासिस्ट विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब देखना यह होगा कि दूषित दवा बेचने वाले मेडिकल संचालक और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।